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SIR में वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर पर चुनाव आयोग ने नहीं दी RTI में जानकारी

लेखक Administrator

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नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर को लेकर चुनाव आयोग ने जानकारी…

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SIR में वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर पर चुनाव आयोग ने नहीं दी RTI में जानकारी

मुख्य बातें

  1. RTI के जवाब में सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से किया इनकार,
  2. ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा का दिया हवाला
  3. चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठ सकते हैं सवाल

नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर को लेकर चुनाव आयोग ने जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित सॉफ्टवेयर का नाम और उसका वर्जन सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इसके पीछे आयोग ने ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया है।

RTI के जरिए मांगी गई थी जानकारी

SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में संभावित त्रुटियों और विसंगतियों की पहचान के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक को लेकर जानकारी मांगी गई थी। इसके तहत चुनाव आयोग से पूछा गया था कि मतदाता सूची की जांच और गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए किस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, सॉफ्टवेयर का नाम और उसका वर्जन बताने का भी अनुरोध किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने 16 अक्टूबर को दिए गए जवाब में इन सवालों से संबंधित जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। आयोग का कहना है कि मांगी गई जानकारी ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से संबंधित है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया

आयोग के जवाब का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि SIR प्रक्रिया के लिए न तो कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित किया गया और न ही कोई नया सॉफ्टवेयर खरीदा गया। हालांकि, पहले से इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर की पहचान से जुड़ी जानकारी भी आयोग ने उपलब्ध नहीं कराई।

इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की पहचान के लिए किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है और उसका तकनीकी संस्करण कौन-सा है। साथ ही, सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके जरिए विसंगतियों की पहचान करने के तरीकों के बारे में भी मांगी गई जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई।

मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ा है मामला

मतदाता सूची का शुद्धिकरण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मतदाता सूची में नामों की दोहराव, गलत प्रविष्टियों, नामों की वर्तनी में त्रुटियों और अन्य संभावित विसंगतियों की पहचान करना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसी जांच में तकनीकी साधनों का इस्तेमाल होने पर उनकी भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर स्वाभाविक रूप से जनहित के सवाल उठते हैं।

बौद्धिक संपदा से जुड़े पहलुओं पर भी विचार

RTI के जवाब में आयोग ने जानकारी साझा नहीं करने के लिए ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा का आधार बताया है। इस मामले में यह सवाल महत्वपूर्ण रहेगा कि सॉफ्टवेयर की पहचान से जुड़ी जानकारी किस सीमा तक सार्वजनिक हित में उपलब्ध कराई जा सकती है और किस प्रकार तकनीकी सुरक्षा को बनाए रखते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।

फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने संबंधित सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार किया है। इस विषय पर आगे कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी सामने आने पर ही सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली और उसके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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